Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 9, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
मनस्तु चञ्चलाभोगं तासु तासु दशासु च ।
बभ्रामातिविचित्रासु वनराजिष्विवैणकः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
किन्तु चंचल शरीरवाले मन ने तो पुनः पुनः अपने से कल्पित स्वर्गगमन
आदि-आदि विचित्र धाराओं में जैसे अत्यन्त विचित्र वनश्रेणियों मे मृग भ्रमण करता है वैसे ही भ्रमण
किया