Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 9, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अनन्तवृत्तान्तघनां पेलवां सुदृढामपि ।
तां संसृतिदशां शुक्रो विदेहोऽनुभवन्स्थितः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
शुक्राचार्य अपने शरीर की कुछ भी परवाह न कर अनन्त वृत्तान्तो से भरी हुई मन की कल्पनामात्र
होने के कारण अत्यन्त कोमल तथा यह सत्य हे, इस भ्रान्तिवश पूर्व देह के विस्मरण से अत्यन्त दृढ़ उस
संसार दशा का अनुभव करते रहे