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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 1, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

तयोरुत्तिष्ठतो सर्वा सभोत्थातुमकम्पत । मन्दवातपरामृष्टा नलिनीवालिलोचना ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

उन दोनों के उठने पर मन्द मन्द वायु से कम्पित भँवररूपी नेत्रवाली वह सारी सभा उठने के लिए चंचल हुई