Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 1, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

लोलमौलिमणिप्रान्तपाटलाम्बरकोटरा । संध्येवाफुल्लनीलाला कार्यसंहारकारिणी ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

चंचल मस्तक मणियों के अग्रभाग से उस सभा के आकाश का मध्यभाग लाल हो गया था, अतएव वह जिसमें नीलकमल खिले न हों तथा दिन के कार्यो का उपसंहार करनेवाली सन्ध्या के तुल्य थी