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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 37

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 1, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 37

संस्कृत श्लोक

महीपतिवसिष्ठाभ्यां प्रणयात्प्रार्थितः प्रभुः । वसिष्ठसद्मनि निशां विश्वामित्रोऽत्यवाहयत् ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

बिताई