Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 10, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
प्रतीहारपतावित्थमुक्तवत्यथ पार्थिवः ।
तथैव चिन्तयामास चित्रां संसारसंस्थितिम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
प्रतीहार के इस तरह कहने पर भी राजा जनक वैसे ही
विचित्र संसार की स्थिति का चिन्तन करते रहे