Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 10, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
शीघ्रमुत्तिष्ठ भद्रं ते नियतं कार्यमाचर ।
न कालमतिवर्तन्ते महान्तः स्वेषु कर्मसु ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाराज, आपका कल्याण हो, शीघ्र उठिये, नित्यकर्म का सम्पादन कीजिये। महापुरुष अपने
कर्मो मे काल का अतिक्रमण नहीं करते