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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, Verses 7–8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 10, verses 7–8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 7,8

संस्कृत श्लोक

स्नातः पवित्रहस्तश्च परिजप्याघमर्षणः । त्वामेव प्रेक्षते देव दक्षिणार्हो द्विजव्रजः ॥ ७ ॥ लसच्चामरहस्ताभिः पाल्यते परमेश्वर । सज्जीकृतास्ते कान्ताभिः शीता भोजनभूमयः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे देव, स्नान के समय अघमर्षण मन्त्रों का जप करनेवाले अतएव दक्षिणा के योग्य ब्राह्मण लोग, जो स्नान कर चुके और पवित्रहस्त है, वे आपकी प्रतीक्षा कर रहे हे । राजन्‌, आपकी कान्ताओं ने भोजन भूमिर्यो सजा रक्खी है, जो लेपन, चन्दन जल के सेक आदि से परिष्कृत होने के कारण शीतल हैं, हे महाराज, वे हाथ में सुन्दर चवर लेकर आपकी प्रतीक्षा कर रही हैं