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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, Verses 4–6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 10, verses 4–6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 4-6

संस्कृत श्लोक

एताः कमलकह्लारकाननभ्रान्तषट्पदाः । कृताः कमलिनीपाशरचितांशुकमण्डपाः ॥ ४ ॥ एताः कमलिनीतीरभुवश्छत्रैः प्रपूरिताः । सचामररथेभाश्वैः स्नानावसरसेविनाम् ॥ ५ ॥ समग्रसुमनःपूर्णैरन्नौषधिपूरिप्लुतैः । सज्जीकृताः पटलकैर्देवार्चनगृहास्तथा ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जहाँ पर कमल और श्वेतकमल के वन में भौरि घूम रहे हैं एवं कमल से युक्त कमल के नाल की रस्सियों से जहाँ पर शामियाने सजाए गये हैं, ऐसी बनाई गयी ये कमलयुक्त तालाब की तीर भूमियाँ स्नान के समय में स्वागत करनेवाले लोगों के चामर, रथ, हाथी और घोड़ों के सहित छत्रों से प्रपूरित हैं। इससे ये तीरभूमियाँ हंस, सारस, नक्र, कमल आदि से युक्त कमलिनी के (कमल से युक्त तालाब के) तुल्य हैँ, यह अर्थतः प्रतीत होता है । ये देवताओं के पूजागृह सब पुष्पो ओर आप्त चाकरों से पूर्णं एवं पक्वान्न ओर जौ के अंकुर आदि औषधियों से अलंकृत प्रान्तभोगों से सजाये गये हैं