Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 10, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
इति संचिन्त्य जनकस्तूष्णीमेव बभूव ह ।
शान्तचापलचेतस्त्वाल्लिपिकर्मार्पितोपमः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा विचार कर राजा जनक चित्त की चपलता के
शान्त होने के कारण चित्र में अंकित के तुल्य मौन हो गये