Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 10, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
प्रतीहारोऽपि नोवाच गौरवेण भयेन च ।
पुनर्वाक्यं महीपानां चित्तवृत्तिषु शिक्षितः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा ओं के चित्त के अनुवर्तन के विषय
में अत्यन्त पटु उस द्वारपाल ने भी गौरव एवं भय से फिर कोई वाक्य नहीं कहा