Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 10, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
प्रतीहार उवाच ।
देव दोःस्तम्भविश्रान्तसमस्तवसुधाभर ।
संपादयोत्तिष्ठ दिनव्यापारं नृपतोचितम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रतीहार ने कहा : हे देव, आपके भुजारूपी स्तम्भ पर समस्त पृथ्वी का भार स्थित है, आप उठिये,
राजधर्म के योग्य व्यवहारों का सम्पादन कीजिये