Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 12, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
सीमान्तं सर्वदुःखानामापदां कोशमुत्तमम् ।
बीजं संसारवृक्षाणां प्रज्ञामान्द्यं विनाशयेत् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
बुद्धि की
मंदता, जो सब दुःखों की सीमा है, आपत्तियों का उत्तम भण्डार है और संसाररूपी वृक्षों का बीज है उस
अज्ञान का विनाश करना चाहिए