Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 12, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
स्वर्गाद्यद्यच्च पातालाद्राज्याद्यत्समवाप्यते ।
तत्समासाद्यते सर्वं प्रज्ञाकोशान्महात्मना ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार प्रज्ञाकोश भी सब सम्पत्तियों की चरम सीमा है, ऐसा दिखलाते हैं।
स्वर्ग से जो सुख मिलता है, पाताल से ({~-}) जो सुख मिलता है और राज्यों से जो सुख मिलता
है, वह सारा सुख महात्मा को प्रज्ञाकोश से प्राप्त होता है