Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 114
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 114 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 114
संस्कृत श्लोक
अभिजाताऽस्वरूपैषा प्रज्ञा क्षोदेषु न क्षमा ।
नोपदेशगिरां योग्या परिपूर्णेव संस्थिता ॥ ११४ ॥
हिन्दी अर्थ
क्योकि उस पुरुष
की बुद्धि चारों ओर से विषयों मे ही आरूढ है, उसीसे ही वह परिपूर्ण-सी स्थित है, अतएव वह प्रत्यक्
नहीं होती, इसलिए सूक्ष्म पदार्थो के विचारों मे वह समर्थ नहीं हे, अतः अध्यात्मशास्त्र के उपदेश के योग्य
नहीं हे