Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
येषामिदमुपादेयमिदं हेयमिति स्थितिः ।
विलीना ते न वाञ्छन्ति त त्यजन्तीह किंचन ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिन लोगों की, यह उपादेय है, यह हेय है, ऐसी अवस्था सर्वत्र अहेय आत्ममात्र के दर्शन से विलीन हो
गई, वे पुरुष न तो किसी वस्तु की वांछा करते हैं और न किसी वस्तु का त्याग ही करते हैँ