Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
मा खेदं भज हेयेषु नोपादेयपरो भव ।
हेयादेयदृशौ त्यक्त्वा शेषस्थः स्वच्छतां व्रज ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, हेय वस्तुओं के
प्राप्त होने पर आप खिन्न न होइये ओर उपादेय वस्तुओं मेँ अभिमान न कीजिये । हेय ओर उपादेय
वस्तुओं में राग द्वेषात्मक वृत्तियों का त्याग कर उनके साक्षी मे एकनिष्ठ होकर विक्षेप शून्य होइये