Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अवस्त्विदमिदं वस्तु यस्येति लुलितं मनः ।
तस्मिन्नोदेति समता शाखोट इव मञ्जरी ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह वस्तु खराब है
इसलिए त्याज्य है, यह वस्तु उत्तम है इसलिए ग्राह्य है, इस प्रकार जिसका मन चंचलता को प्राप्त हुआ,
उस पुरुष मे समता शाखोट वृक्ष मेँ मंजरी के समान नहीं होती