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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

युक्तायुक्तैषणा यत्र लाभालाभविलासिनी । समता स्वच्छता तत्र कुतो वैराग्यभासिनी ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

यह वस्तु मेरे अनुकूल हे अतः यह मुझे प्राप्त हो, इस प्रकार लाभ से विलासित होनेवाली ओर यह वस्तु मेरे प्रतिकूल हे अतः यह मुझे कभी भी प्राप्त न हो, इस प्रकार द्वेष से विलासित होनेवाली एषणा जिस पुरुष में है, उसमें वैराग्य से उदित होनेवाली समता ओर स्वच्छता कहाँ ?