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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

एकस्मिन्ब्रह्मतत्त्वेऽस्मिन्विद्यमाने निरामये । नानाऽनानातया नित्यं किमयुक्तं क्व युक्तता ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

उस पुरुष मे समता और स्वच्छता की संभावना में क्या विरोध है, ऐसा प्रश्न होने पर कहते हैं। अद्वितीय निर्दोष इस ब्रह्मतत्त्व के ही भेदाभेद कल्पना से विद्यमान रहने पर क्या अत्यन्त अयुक्त है ? और कहाँ पर युक्तता है ? भाव यह कि यदि सब पदार्थ असंग, अद्वितीय, आनन्दरूप और अभिन्न ही हैं तो आत्मरूप होने के कारण सब अनुकूल ही हैं, यदि भिन्न हैं तथापि आत्मा से उनका स्पर्श न होने से न अनुकूल हैं, न प्रतिकूल हैं, इसलिए भेद की अवस्था में भी अयुक्तता ओर युक्तता का अवकाश नहीं हे । पूर्वोक्त पुरुष में तो युक्तता-अयुक्तता विद्यमान है, अतः उसमें स्वच्छता और समता की संभावना में विरोध है ही