Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

ईप्सितानीप्सिताशङ्के मर्कट्यौ चित्तपादपे । चञ्चले स्फुरतो यस्मिन्कुतस्तस्येह सौम्यता ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

इच्छित, अनिच्छित की आशंकारूपी चंचल वानरियाँ जिस पुरुष के चित्तरूपी वृक्ष पर स्फुरित होती हैँ । भला उस पुरुष को शान्ति कहाँ से प्राप्त हो सकती है ?