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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

मुष्टयो मोहबीजानां वृष्टयो विविधापदाम् । कुदृष्टयः क्षयं यान्ति दृष्टे तस्मिन्परावरे ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

उस परब्रह्म परमात्मा का साक्षात्कार होने पर अहन्ता-ममता प्रतीतिरूप हृदय ग्रन्थियाँ नष्ट हो जाती हैं, जो दुर्वासनाओं की मुद्वियाँ हैं यानी बीज की मुड़ी की तरह अपने भीतर दुर्वासनाओं का दृढ़तापूर्वक ग्रहण करनेवाली और चित्तरूपी खेत में बोई जानेवाली हैं और आध्यात्मिक आदि विविध दुःखों की वृष्टियाँ हँ