Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
चेत्येन रहिता यैषा चित्तद्ब्रह्म सनातनम् ।
चेत्येन सहिता यैषा चित्सेयं कलनोच्यते ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे सिद्ध हुआ कि वित् का चेत्य त्याग ही ब्रह्मतारूप से पर्यवसन्न होना है, ऐसा कहते हैं।
चेत्य से रहित जो यह चित् है, वह सनातन ब्रह्म है और चेत्यसहित जो यह चित् है, वही यह
कलना है