Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 58
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
अतः शास्त्रविचारेण वैराग्येण परेण च ।
निग्रहेणेन्द्रियाणां च बोधयेत्कलनां स्वयम् ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए शास्त्रविचार से, उत्कृष्ट वैराग्य से
ओर इन्द्रियों के निग्रह से कलना को कलनारूप जो तीन अवस्थाएँ हे, तद्रूप स्वप्न से लोटाये