Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
सैषा चिदेव जगतामागतेव स्वशक्तितः ।
न संप्रबोधिता यावद्रूपं तावन्न बुध्यते ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
वह चिति ही अपनी मायाशक्ति से जगत्ता को मानों
प्राप्त हुई है। जब तक गुरु, शास्त्र और विचारों से वह प्रबोधित नहीं की जाती है, तब तक वास्तविक
पूणनिन्द अद्वितीयरूप ब्रह्म नहीं जाना जाता है