Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
संपन्ना कलनानाम्नी संकल्पानुविधायिनी ।
अवच्छेदवती वाग्रा हेयोपादेयधर्मिणी ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
अतीत विषयों के आकार की कल्पना से चित्तता के समान अनागत विषयो के आकार की कल्पना
से संकल्प-विकल्प का अनुविधान करने के कारण मनस्ता को भी वह प्राप्त हुई है, इस आशय से
कहते है।
इस तरह दो प्रकार से परिच्छेद को प्राप्त हुई, पूर्व जन्म के इष्ट-अनिष्ट-साधनों का निश्चय कर
भावी इष्ट-अनिष्ट साधनता का संकल्प कर हेय-उपादेय धर्मवाली मुख्य वह चिति ही संकल्प को
उत्पन्न करनेवाली कलना नामक होगी