Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
चेतनेन जडा राम कलनोपलरूपिणी ।
पद्मिनीवातपेनासौ परेणैव प्रबोध्यते ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, पाषाणतुल्य, जड कलना
जैसे पद्मिनी धूप से प्रबोधित होती हे वैसे ही परम चेतन से ही बोधित होती हे