Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
अयं सोऽहमिदं तन्म इति या कलनाविला ।
प्राणात्मतत्त्वयोस्तस्याः संज्ञा जीवेति कथ्यते ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
वही "यह मैं हूँ” "यह मेरा है” इस
प्रकार जब विषयों की कल्पना करती है, तब स्पन्द के बिना उसमें आक्षेप हो नहीं सकता, इसलिए
स्पन्दरूप प्राणतत्त्व के और चिदात्मक आत्मतत्त्व के, जो पृथक्-से हो गये, विवेक न होने के कारण
फिर एेक्य के अध्यास से जड़संवलितचिद्रूप कलना जीव नाम से कही जाती है