Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
ये दैवनिष्ठाः कृत्यादौ कुविकल्पपरायणाः ।
तेषां मन्दा मतिस्तात नानुगम्या विनाशनी ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि भाग्यवश स्वयं ही समय आने पर ज्ञान हो ही जायेगा ? हमारे प्रयत्न से क्या
लाभ है ? तो इस पर कहते हैं।
जो लोग प्रयत्न, विवेक, वैराग्य, विचार आदि कार्यों में भाग्य के आधीन रहते हैं और भाग्य के
प्रतिकूल होने पर अपने हजारों प्रयत्नों से क्या सिद्ध होगा, बहुत से लोग फल प्राप्ति के लिए प्रयत्न
करते हैं, पर दैव से विनष्ट हुए उनका काम, क्रोध आदि से पतन देखा जाता है - इत्यादि कुकल्पनाएँ
करते है, उनकी मन्द मति विनाश की ओर ले जानेवाली है, उनका अनुसरण नहीं करना चाहिए