Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
विवेकं परमाश्रित्य विलोक्यात्मानमात्मना ।
धिया विरागोद्धुरया संसारजलधिं तरेत् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
परम विवेक का अवलम्बन कर आत्मा का अपने आप साक्षात्कार कर वैराग्य से वृद्धि को प्राप्त हुई
(अनादिकाल से निमग्न आत्मा के उद्धार में समर्थ) बुद्धि से संसारसागर को पार करे