Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 14, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
कियन्तः पश्य पशवः प्रत्यहं प्रतिमण्डलम् ।
सूनावद्भिर्निहन्यन्ते कैवात्र परिदेवना ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
देखिये, प्रत्येक देश में प्रतिदिन पशु हिंसा स्थान में नियुक्त लोगों द्वारा कितने पशु मारे जाते हैं, इसमें
कौन-सी विलाप करने की बात है ?