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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 14, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

दिशं प्रति गिरीन्द्रेषु पुलिन्दाद्या वने वने । निघ्नन्ति मृगलक्षाणि कैवात्र परिदेवना ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रत्येक दिशा में हर एक वन में बड़े-बड़े पर्वतों पर शबर आदि लाखों मृगों को मारते हैं, इसमें भला विलाप की क्या गुंजाइश है ?