Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 14, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
न तिर्यक्समधर्माण उपदेश्या नरा भुवि ।
कथार्थकथनेनार्थः कः स्थाणुनिकटे वने ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
संसार में पशु-पक्षी सरीखे लोगों को उपदेश देना उचित नहीं है । भला वन में ठ के निकट कथा
का अर्थ कहने से कौन प्रयोजन सिद्ध हो सकता है ?