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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 14, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

विपर्यस्तेन्द्रियं मत्तं मदिराघूर्णितेक्षणम् । धर्मनिर्णयसाक्षित्वे कः प्रमाणीकरोत्यधीः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

कोन अबुद्धिपुरुष मदिरा के नशे से जिसकी आखें चदी हो, अतएव जिसकी इन्द्र्यो अपना कार्य करने में असमर्थ हों, ऐसे मत्तपुरुषको धर्म तत्त्व के निर्णय में साक्षीरूप से प्रमाणित करेगा ?