Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 14, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
कः शवं वा श्मशानस्थं समवायकथाशतम् ।
परिपृच्छति संदेहे कश्च मूर्खं प्रशास्ति च ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
कौन
पुरुष श्मशान में पड़े हुए शव से सन्देह होने पर जन-समूहों की सैकड़ों कथाएँ पूछेगा वैसे ही कोन
मूर्ख को उपदेश देगा ! यानी मूर्ख को उपदेश देना श्मशान में पड़े हुए मुर्दे से जन समूहों से सम्बन्ध
रखनेवाली कथा पूछने के तुल्य व्यर्थ है