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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 14, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

येनाशयबिलस्थोऽपि मूकोन्धोऽपि न निर्जितः । मनोव्यालः सदुर्बुद्धिः कथं नामोपदिश्यते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जो हृदयरूपी बिल मेँ स्थित मनरूपी गूंगे और अन्धे साँप को नहीं जीत सका, उस दुर्बुद्धि को किस प्रकार उपदेश दिया जा सकता है ?