Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 14, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
मनो न विजितं राम येनासदपि दुर्धिया ।
तेनाग्रस्तविषेणैव म्रियते विषमूर्च्छया ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस दुर्बुद्धि पुरुष ने अविद्यमान मन पर विजय प्राप्त नहीं की, वह विष खाये बिना
ही विष की मूर्च्छा से मरता हे