Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 15, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तृष्णयाशयकौशिक्या हृद्यमङ्गलभूतया ।
रूढया भगवानेष विष्णुर्वामनतां गतः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हृदय में स्थित उल्लूरूप अमंगलभूत तृष्णा से, जो हृदय में घोंसला बना चुकी हो
उससे, भगवान विष्णु तक वामनता को प्राप्त हुए