Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 15, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
एतामहंभावमयीमपुण्यां छित्त्वानहंभावशलाकयैव ।
स्वभावनां भव्य भवान्तभूमौ भवाभिभूताखिलभूतभीतिः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस अपवित्र अहंभावमयी तृष्णा को अनहंभावरूप कैंची से काटकर आप सम्पूर्ण
भूतो से होनेवाले भयों का तिरस्कार कर संसार की बाध भूमि ब्रह्य में स्थित होइए