Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 15, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
एतां दुःखप्रसविनीमनात्मन्यात्मभावनाम् ।
न भावयसि चेद्राम तदा तज्ज्ञेषु गण्यसे ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, यदि आप दुःख को उत्पन्न करनेवाली अनात्मा में आत्मभावना की भावना न
करेगे, तो आप तत्त्वज्ञानियों में गिने जायेंगे