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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 15, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

यान्येतानि दुरन्तानि दुर्जराण्युन्नतानि च । तृष्णावल्ल्याः फलानीह तानि दुःखानि राघव ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, संसार में जो ये दुर्निवार, दुःख से दूर करने के अयोग्य बड़े बड़े दुःख हैं, वे तृष्णारूपी लता के फल हैं