Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 15, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अदृश्यैवात्ति मांसास्थिरुधिरादि शरीरकात् ।
मनोबिलविलीनैषा तृष्णावनशुनी नृणाम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
मनरूपी बिल में छिपी हुई यह तृष्णारूपी भेड़िया अदृश्य होकर ही
मनुष्यों के शरीर से मांस, हड्डी, खून आदि खाती है