Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 16, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
ईप्सितानीप्सिते न स्तो यस्येष्टानिष्टवस्तुषु ।
सुषुप्तवच्चरति यः स मुक्त इति कथ्यते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस पुरुष को इष्ट ओर अनिष्ट वस्तुओं
में इच्छा ओर द्वेष नहीं होते और जो पुरुष अज्ञानी की दृष्टि में इष्ट और अनिष्टरूप से सम्मत
वस्तुओं में सुषुप्त पुरुष के तुल्य अनासक्त होकर व्यवहार करता है, वह मुक्त कहा जाता हे