Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 16, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
हेयोपादेयकलने ममेत्यहमिहेति च ।
यस्यान्तः संपरिक्षीणे स जीवन्मुक्त उच्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
शरीर में और शरीर के सम्बन्ध में "अहम्" (मैं), मम” (मेरा) ऐसी हेयोपादेय कलना जिस पुरुष
के अन्दर क्षीण हो गई है, वह जीवन्मुक्त कहा जाता है