Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 16, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
हर्षामर्षभयक्रोधकामकार्पण्यदृष्टिभिः ।
न परामृश्यते योऽन्तः स जीवन्मुक्त उच्यते ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हर्ष, रोष, भय, क्रोध, काम और
कार्पण्य दृष्टियों का जिसके हृदय में स्पर्श नहीं होता, वह मुक्त कहलाता है