Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 17, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
सर्वमात्माहमेवेति निश्चयो यो महामते ।
तमादाय विषादाय न भूयो याति मे मतिः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें तीसरे निश्वय का प्रयोजन कहते हैं।
हे महामते, सर्वात्मा मैं ही सब कुछ हूँ, इस प्रकार का जो निश्चय है, उसे प्राप्त कर मेरी बुद्धि फिर
विषाद को प्राप्त नहीं होती है