Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 17, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
तिर्यगूर्ध्वमधस्ताच्च व्यापको महिमात्मनः ।
सर्वमात्मेति तेनान्तर्निश्चयेन न बध्यते ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा की महिमा ऊपर-नीचे-तिरछे सर्वत्र है, सभी आत्मा है,
इस प्रकार के उस आन्तरिक निश्चय से पुरुष बन्धन में नहीं पड़ता