Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 17, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
पृथक्कटककेयूरनूपुरादि नकाञ्चनात् ।
भिन्नास्तरुतृणाकारकोटयश्चैव नात्मनः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कड़ा, बाजुबन्द, नूपुर
आदि सुवर्ण से पृथक् नहीं है, वैसे ही वृक्ष, तृण आदि करोड़ों आकार आत्मा से भिन्न नहीं है