Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
पूर्णां दृष्टिमवष्टभ्य ध्येयत्यागविलासिनीम् ।
जीवन्मुक्ततया स्वस्थो लोके विहर राघव ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए आप भी विद्रच्चरित्र से ही विहार कीजिये, अन्य से नहीं, ऐसा कहते है ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, ध्येयनामक वासनात्याग से विलसित होनेवाली पूर्ण दुष्ट का अवलम्बन करके
स्वस्थ हुए आप जीवन्मुक्तरूप से विहार कीजिये