Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अन्तर्नैराश्यमादाय बहिराशोन्मुखेहितः ।
बहिस्तप्तोऽन्तराशीतो लोके विहर राघव ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, भीतर निराशता का ग्रहण कर और बाहर आशान्वित पुरुषों की सी चेष्टावाले
अतएव धनादि नाश होने पर बाहर संतप्त के समान संतप्त किन्तु भीतर चारो ओर शीतल आप लोक
में विहार कीजिये